DTU, NSUT, IIIT-Delhi, IGDTUW और DSEU की Round 2 क्लोजिंग रैंक का पूरा विश्लेषण — ब्रांच-वार कटऑफ, कॉलेज की तुलना और आपकी रैंक पर क्या मिल सकता है, सब एक ही पेज पर।
अपनी रैंक जांचें → पूरी कटऑफ तालिकाअपनी JEE (Main) 2026 CRL डालिए — General (GNGN) Round 2 क्लोजिंग रैंक के आधार पर सभी 5 यूनिवर्सिटी की योग्य ब्रांच तुरंत दिख जाएँगी।
General कैटेगरी, दिल्ली रीजन, Round 2। बार जितनी छोटी, एडमिशन उतना ही कठिन।
यूनिवर्सिटी चुनिए, रीजन टॉगल कीजिए। नारंगी रेखा वाली पंक्तियाँ सबसे ज़्यादा डिमांड वाली ब्रांच हैं।
दिल्ली रीजन में सबसे कठिन क्लोज़ IIIT-Delhi के CSE-AI का रहा (बिना बोनस) — NSUT CSAI (7,791) और DTU CSE (12,771) से भी आगे। AI-ब्रांड वाली ब्रांचों की डिमांड कोर CSE को पार कर चुकी है।
DTU CSE दिल्ली रीजन में 12,771 पर बंद हुआ, जबकि आउटसाइड दिल्ली में सिर्फ 5,171 पर। NSUT CSE में भी यही पैटर्न है (12,075 बनाम 5,709)। दिल्ली के स्टूडेंट्स को व्यावहारिक रूप से लगभग दोगुनी रैंक का कुशन मिलता है।
दिल्ली रीजन में 22,000 CRL तक DTU (CSE/DSA/IT/SE/IT-CyS), NSUT (CSAI/CSE/CSDS/IT/MAC) और IIIT-D (CSAI/CSE/CSAM/CSEcon/CSD/CSSS) — तीनों टॉप कॉलेजों में कंप्यूटिंग सीट उपलब्ध थी।
IGDTUW CSE 59,534 (दिल्ली) पर बंद हुआ — NSUT/DTU CSE से करीब 5 गुना ज़्यादा रिलैक्स्ड। 50k–120k रैंक वाली महिला उम्मीदवारों के लिए यह सबसे मज़बूत CSE/IT विकल्प है।
DSEU का CSE (Pusa-1) 83,508 पर और बाकी कैंपस 1.2 लाख+ तक गए। 80k–130k दिल्ली रैंक पर भी B.Tech CSE/AI/DS संभव है — Round 3 की चॉइस लिस्ट में ज़रूर रखें।
Round 2 → 3 में विदड्रॉअल और अपग्रेड की वजह से क्लोजिंग रैंक आम तौर पर 5–15% और नीचे (रिलैक्स्ड) होती है। बॉर्डर पर हों तो Float रखना फायदेमंद है।
कट-ऑफ के नंबरों के पीछे की असली तस्वीर: क्यों शिफ्ट धीमी रहती है, किस कॉलेज में क्या हुआ, और आगे क्या करें।
JAC Delhi (Joint Admission Counselling) की पूरी प्रक्रिया में राउंड 2 का मोड़ सबसे दिलचस्प, तनावपूर्ण और निर्णायक माना जाता है। राउंड 1 के परिणाम आने के बाद जब पहला उत्साह, घबराहट और शुरुआती दौड़-भाग थोड़ी थमती है, तब राउंड 2 का खेल शुरू होता है। बहुत से छात्र यह उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं कि राउंड 2 आते ही कट-ऑफ में बहुत बड़ा उछाल आएगा और उन्हें तुरंत मनपसंद ब्रांच मिल जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत, डेटा और छात्रों की मनोदशा को जब आप पास से देखते हैं, तो बात कुछ और ही नजर आती है।
राउंड 1 खत्म होते ही काउंसलिंग का पहला चरण पार हो चुका होता है। जिन बच्चों को पहली पसंद मिल गई, वे तो राहत की सांस लेकर बैठ जाते हैं, लेकिन असली कशमकश उन 80-90% बच्चों के साथ शुरू होती है जो बीच में फंसे हैं। किसी को DTU में मैकेनिकल मिला है और वह ECE की उम्मीद लगाए बैठा है; किसी को NSUT वेस्ट कैंपस मिला है और वह मेन कैंपस में पैर रखना चाहता है; वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें राउंड 1 में कुछ भी नहीं मिला।
राउंड 2 के समय छात्रों और अभिभावकों के मन में सबसे ज्यादा बेचैनी होती है। इंटरनेट पर हर कोई पिछले साल की पीडीएफ फाइलें खंगाल रहा होता है, टेलीग्राम ग्रुप्स में दिन-रात चर्चा चलती है कि "कट-ऑफ कितना गिरेगा?", "सीटें खाली होंगी या नहीं?"। यह वह दौर है जहाँ उम्मीदें बहुत ऊंची होती हैं, लेकिन जब राउंड 2 का नतीजा स्क्रीन पर खुलता है, तो बहुत से चेहरों पर सन्नाटा छा जाता है क्योंकि कट-ऑफ में वो 'जादुई गिरावट' नहीं दिखती जिसकी सबने कल्पना की थी।
छात्रों को लगता है कि राउंड 1 से राउंड 2 के बीच कट-ऑफ में भारी बदलाव आएगा, लेकिन ज्यादातर मामलों में राउंड 2 का मूवमेंट काफी धीमा (Marginal Shift) रहता है। इसके पीछे कई तकनीकी और व्यवहारिक कारण काम करते हैं:
राउंड 2 में क्षेत्रीय कोटे का अंतर सबसे ज्यादा खुलकर सामने आता है। यह वह जगह है जहाँ सिस्टम की असमानता बहुत से बच्चों को चुभती है।
सामान्य वर्ग के लिए राउंड 2 भी अग्निपरीक्षा जैसा है। 10,000–12,000 रैंक वाले बच्चे को भी DTU/NSUT में ढंग की ब्रांच के लिए तरसना पड़ता है। क्लोजिंग रैंक में बमुश्किल 500–1,000 का ही फर्क आता है। असली राहत राउंड 4 या इंटरनल अपग्रेडेशन में ही मिलती है।
तस्वीर थोड़ी राहत भरी है, पर यहाँ भी CS/IT 12,000–18,000 रैंक पर पैक हो जाती है। 50,000–80,000 रैंक वाले बच्चों को भरोसा रहता है कि कोई कोर ब्रांच (मैकेनिकल, सिविल, केमिकल, बायोटेक) आगे ज़रूर मिलेगी।
प्रत्येक संस्थान का अपना मिजाज है और राउंड 2 में हर कैंपस की कहानी अलग मोड़ लेती है:
CSE, IT, SE की कट-ऑफ में नाममात्र बदलाव; MCE और ECE में हल्का मूवमेंट। जिन्हें प्रोडक्शन, एनवायरनमेंट या बायोटेक मिलती है, वे ज्यादातर 'Float' पर रहते हैं कि आगे मैकेनिकल/सिविल मिल जाए।
मेन कैंपस (द्वारका) की CSE/CSDA/IT सीटें पूरी तरह लॉक रहती हैं। ईस्ट (गीता कॉलोनी) और वेस्ट (जाफरपुर) कैंपस में सबसे ज्यादा हलचल — बच्चे अस्थायी तौर पर सीट लेते हैं और दूसरी काउंसलिंग में कुछ मिलते ही छोड़ देते हैं।
भारी फीस (₹4 लाख+/वर्ष) और सख्त करिकुलम के कारण कुछ छात्र सीट मिलने के बाद भी पीछे हटते हैं। CS+Social Sciences, CS+Design, ECE में थोड़ी मूवमेंट; बोनस पॉइंट्स वाले छात्र यहाँ जगह पहले ही पक्की कर लेते हैं।
छात्राओं के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक विकल्प। CSE/IT/AI-ML का प्लेसमेंट रिकॉर्ड टॉप NITs को टक्कर देता है। दिल्ली की सामान्य वर्ग छात्राओं को 40,000–60,000 रैंक तक भी अच्छी ब्रांच मिलने की राह खुलती है।
1 लाख से 2 लाख+ रैंक वालों के लिए जीवनरेखा। कट-ऑफ काफी नीचे तक खिसकती है; जिन्हें सरकारी कॉलेज का ठप्पा चाहिए, वे राउंड 2 में ही सीट सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं।
आरक्षण के नियमों का असर राउंड 2 में साफ दिखाई देता है:
| श्रेणी | दिल्ली रीजन ट्रेंड | आउटसाइड दिल्ली ट्रेंड | राउंड 2 का व्यवहार |
|---|---|---|---|
| General | टॉप ब्रांचेज 15k–20k, कोर 70k तक | टॉप ब्रांचेज 4k–8k, कोर 25k–30k तक | न्यूनतम हलचल; छात्र अपनी सीट से चिपके रहते हैं |
| OBC-NCL | 50k–1.2 लाख तक बेहतरीन ब्रांचेज | 15k–35k के बीच मुकाबला सिमटा | दिल्ली के OBC बच्चों के लिए अच्छा फैलाव |
| EWS | 30k–70k के बीच कोर/टेक का संघर्ष | 10k–20k के भीतर सीटें पैक | सीटें कम, मूवमेंट बहुत धीमी |
| SC / ST | 1.5 लाख–3 लाख+ तक भी विकल्प | 50k–1.5 लाख के आसपास ब्रांचेज | सीट अपग्रेडेशन सबसे तेज |
| CW (डिफेंस) | प्रायोरिटी I–VI पर निर्भर | प्रायोरिटी आधारित सीमित सीटें | दस्तावेज़ सत्यापन के बाद स्थिति साफ |
JAC Delhi को अकेले कमरे में बैठकर नहीं समझा जा सकता। इसका सीधा संबंध JoSAA (IITs, NITs, IIITs) और BITS पिलानी की प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। राउंड 2 के समय JoSAA के भी शुरुआती 2-3 राउंड चल रहे होते हैं; जिन्हें टॉप NIT (त्रिची, वारंगल, सुरथकल) में अच्छी ब्रांच मिलती है, वे धीरे-धीरे JAC सीट छोड़ने का मन बनाते हैं। BITS की भारी फीस अफोर्ड करने वाले और CS/ECE पाने वाले छात्र भी यहीं से नाम वापसी शुरू करते हैं — यह प्रक्रिया राउंड 2 के अंत और राउंड 3 के बीच गति पकड़ती है।
इसीलिए राउंड 2 को हमेशा "तैयारी का राउंड" माना जाता है — असली बड़ा बदलाव राउंड 3-4 में आता है, राउंड 2 में नहीं।
JAC Delhi राउंड 2 किसी दौड़ का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि बीच का वह हिस्सा है जहाँ सांसें फूलती हैं लेकिन धैर्य बनाए रखना सबसे ज़रूरी होता है। कट-ऑफ के धीमेपन से घबराने के बजाय अपनी प्राथमिकताओं पर टिके रहें, नियमों को बारीकी से समझें और सही समय पर सही कदम उठाएं।
अगर अलॉट हुई सीट आपकी टॉप-चॉइस यूनिवर्सिटी + ब्रांच है, तो Freeze करके फीस की डेडलाइन से पहले एडमिशन कन्फर्म कीजिए और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा रखिए। अब रिस्क लेने की ज़रूरत नहीं।
मौजूदा सीट सुरक्षित रहती है और ऊपर की चॉइस के लिए आप Round 3 में विचार किए जाते हो। हर राउंड में कटऑफ रिलैक्स होता है — Rank Lens में "Close call" वाली ब्रांच Round 3 में पहुँच में आ सकती हैं।
Round 3 से पहले अपनी प्रेफ़रेंस लिस्ट में DSEU कैंपस और कम डिमांड वाली ब्रांच (EE, ME, Civil, EP) जोड़िए। Spot round का इंतज़ार मत कीजिए — वहाँ विकल्प बहुत कम बचते हैं।
काउंसलिंग, कटऑफ, Freeze/Float, डॉक्यूमेंट और Round 3 — सब कुछ एक जगह।